""बालश्रम""


है बालश्रम कानूनी अपराध ,

फिर भी कहाँ रुक पाए है |


क्यूंकि,,रुक भी जाए ,अगर शारीरिक श्रम ,तो भी,

मानसिक बाल श्रम ,कौन है जान पाए ?


जब पीड़ा सहते देखे माँ - बाप को,,

दर्द शमशीर सा चुभता है।


औपचारिकता से कहि परे ,आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु ,

स्वयं कर लेगा यह परिश्रम,,

खेलने की उम्र में ,बन बैठेगा स्वयं खिलौना ||

फूल सी कोमल हथेलिया,बन जाएगी कठोर हथोड़ी ||


यथार्थ उजागर ही धर्म नहीं,

कदापि, चलो हम भी कुछ बदलाव लाए ||


इस बाल मन को, बाल श्रम से निजात दिलवाए ,

इस बाल मन को, बाल श्रम से निजात दिलवाए ||