सब कुछ तबाह करने डुबोने के बाद भी
आँसू खत्म हुए नहीं रोने के बाद भी
माना बदन है घर मिरा लेकिन कभी-कभी
होता नहीं हूं मैं यहां होने के बाद भी
सूरज चला गया है मिरा छोड़कर मुझे
कटती नहीं है रात अब सोने के बाद भी
किरदार धुल गए हैं जिस्मों पे रह गए
ज़ख़्मों के कुछ निशान धोने के बाद भी
बंजर जमीन थी सो यहाँ कुछ न उग सका
सहरा को खाद देने भिगोने के बाद भी
कैसे मिरे जज़्बात को समझा नहीं गया
लफ़्ज़ों को आँसुओं में पिरोने के बाद भी
मेरे साथ अब नहीं है मुझ में है सर-ब-सर
पाया यूँ उसको मैंने खोने के बाद भी
