मुद्दतों के बाद फिर इंसान होना था मुझे
दुख में शामिल होना था दुनिया के रोना था मुझे
बस जरा सी देर को ये जादू होना था मुझे
उसकी आँखों में ही सारी रात सोना था मुझे
आँसुओं में सारे ही गम को डुबोना था मुझे
चुप नहीं होना था थोड़ा और रोना था मुझे
ये भी कैसी शर्त थी जो होना ही दुश्वार था
ख़ुद को पाने के लिए ख़ुद को ही खोना था मुझे
थी बहुत जरख़ेज मिट्टी दोस्तों इस जिस्म की
इसलिए अब की फसल में ज़ख़्म बोना था मुझे
मत इबादत कर मेरी बस प्यार कर बस प्यार कर
रब नहीं होना था तेरा इश्क़ होना था मुझे
