सारी दुनिया सो गयी है रात आधी हो गयी है

बह रहे आँसू नयन से नींद बागी हो गयी है

मन मेरा अब है नहीं मुझ पर नहीं अधिकार मेरा

तुम नहीं तुम मैं नहीं मैं सब हम में साझी हो गयी है

नींद बागी हो गयी है....

रात आधी हो गयी है।

चांद अब चढ़ने लगा है धीरे-धीरे गगन में

जैसे मादकता भरी है बह रही पुरवा पवन में

याद फिर आने लगा है किस्सा गुजरे दिनों का

ग़म भी मुस्काने लगा है गुदगुदी होती है तन में

चांदनी छूकर जो तुमको धीरे से गिरती धरा पर

अंबर सुनहरा हो गया, धरती गुलाबी हो गयी है।

रात आधी हो गयी है....

यह तुम्हारा मौन जाने बातें कितनी कह गया है

अनकहा किस्सा कोई आधा अधूरा रह गया है

एकटक नजरें तुम्हारी कर रही कोई इशारा

गिरती पलकें कह रही हैं बिन कहे सब हाल तुम्हारा

एक बस नजरे करम कर दो अगर हम पर जरा सा

मिल गई खुशियां सभी अपनी दिवाली हो गई है।

रात आधी हो गयी है...