ग़म में जो मुस्कुरा रहा हूँ मैं

समझो मातम मना रहा हूँ मैं


अपने आँसू छुपा रहा हूँ मैं

दिल में दरिया बहा रहा हूँ मैं


सबको चेहरा दिखाना है अपना

अपना चेहरा छुपा रहा हूँ मैं


आदमी कुछ बरस से हूँ शायद

मुद्दतों तो ख़ुदा रहा हूँ मैं


देर तक सो रहा हूँ मतलब है

ख़्वाब कोई सजा रहा हूँ मैं


होश में ओढ़ ली थी ख़ामोशी

नींद में बोलता रहा हूँ मैं


मुझको मालूम ही नहीं सच में

क्या से क्या बड़बड़ा रहा हूँ मैं


और ज्यादा करीब रहता हूँ

जब भी उस से जुदा रहा हूँ मैं