चाहे कम संसार मिले
पर थोड़ा सा प्यार मिले
मेरे लफ़्ज़ों को थोड़ी
सच की पैनी धार मिले
दोनों थे दो कश्ती में
सो दरिया के पार मिले
वक्त के हाथों जो हारे
सब के सब लाचार मिले
ख़ार भरी राहों के बाद
कुछ फूलों के हार मिले
बदनामी की गलियों में
सारे इज़्ज़तदार मिले
कल दौलत की कदमों में
कुछ शाही दस्तार मिले
चोरी हुआ खजाना जब
सोते पहरे-दार मिले
आंखों से आंसू निकले
जब दो बिछड़े यार मिले
मेरी ठहरी दुनिया को
थोड़ी सी रफ़्तार मिले
मेरी टूटी कश्ती थी
मुझको ही मझदार मिले
खुशियों की जब छुट्टी है
ग़म को भी इतवार मिले
