किसी आँख का इज़हार पढ़ना

हाँ मुश्किल है यारों प्यार पढ़ना


नहीं आया मुझे भी यार पढ़ना

मोहब्बत में कभी दीवार पढ़ना


जब दौलत पढ़ाई जाए तुमको

सिखाया माँ ने कि दस्तार पढ़ना


किसी किरदार को पढ़ने से पहले

उस की हैसियत, मे'यार पढ़ना


हुकूमत ग़र करे इकरार की ज़िद

तो तुम भी जोर से इंकार पढ़ना


ख़बर-दारी ज़रूरी तो है लेकिन

ज़रूरी तो नहीं अख़बार पढ़ना


जहां हो खेल दौलत का ज़रूरी

जगह कोई भी हो बाज़ार पढ़ना


अगर पढ़कर नहीं बेहतर हुए तुम

समझ लो हो गया बेकार पढ़ना


दुश्मन को फक़त दुश्मन कहा है

मुझे आया नहीं ग़द्दार पढ़ना


सच को सच कहने के लिए ही

मैंने छोड़ दिया दरबार पढ़ना


तुम्हें जब भी कोई नफ़रत पढ़ाए

नफ़रत छोड़ना बस प्यार पढ़ना