उसका चेहरा यार पढ़ कर आ गए

उस पे लिक्खा प्यार पढ़ कर आ गए


फिर वही गलती हुई है आज भी

दुश्मनों को यार पढ़ कर आ गए


हमने पढ़ना था गणित-भूगोल, हम

यार हुस्न औ प्यार पढ़ कर आ गए


सबके हाथों में हैं तलवारें यहां

सब के सब पैकार पढ़ कर आ गए


बोलना था दीन और ईमान पर

इश्क के अशआर पढ़ कर आ गए


हमने रिश्तों को पढ़ा स्कूल में

दोस्त कारोबार पढ़ कर आ गए


आप दुनिया-दार होने से रहे

आप तो लाचार पढ़ कर आ गए


आदतन थे आप बंजारा-मिज़ाज

आप क्यूँ घर-बार पढ़ कर आ गए


हमने पढ़ने की मनाही थी प हम

इश्क़ ही सौ-बार पढ़ कर आ गए


सबने आँखों में छुपा रक्खे थे जो

चेहरे पुर-असरार पढ़ कर आ गए