मुझ सा कोई किरदार बनाया नहीं गया

किस्सा मेरा अंजाम तक लाया नहीं गया


सारे शहर ने देखा मुझे डूबते हुए

अफसोस मुझे फिर भी बचाया नहीं गया


इसलिए ये लोग नहीं हो सके जहीन

इन को अदब का पाठ पढ़ाया नहीं गया


आंसू से डुबो देंगे अब इस जमीं को लोग

ग़र रोते हुए लोगों को हंसाया नहीं गया


जब मुश्किलों में थे हम लोग एक वक्त

सब अपने चले गए इक पराया नहीं गया


इसलिए कि हम ने झेले हैं दिल के दर्द

हम से किसी का दिल दुखाया नहीं गया


रह रह के लौट आता है यादों की शक्ल में

एक लम्हा जिसे कभी भुलाया नहीं गया


हम ढूंढते रहे किस-किस को भीड़ में

और हम से हमीं को मिलाया नहीं गया


अब क्या क्या कहें उसे और क्या नाम दें

एक ताल्लुक कि जिसे निभाया नहीं गया


आने के बाद जाना मुश्किल है बहुत मिश्र

दिल के जहान में जो आया नहीं गया