आते हुए मिलें हम कि जाते हुए मिलें

जब भी मिलें किसी से मुस्कुराते हुए मिलें


कितनी अजीज होगी सबको वो मुलाक़ात

जो दिल भी दिल से हाथ मिलाते हुए मिलें


मैं ढूंढता हूं ऐसे लोगों को शहर शहर

जो मुश्किलों की खाक़ उड़ाते हुए मिलें


मिलना जब किसी से दिल खोल के मिलें

ये क्या कि अपना चेहरा छुपाते हुए मिलें


जब मिलें किसी से फिर इस तरह मिलें

कि रस्मों के तमाम पर्दे हटाते हुए मिलें


करते नहीं है रोशनी अब रहगुज़र में लोग

मुमकिन है कुछ चिराग़ बुझाते हुए मिलें


गुज़रे दिनों की बात है कि गांव में भी लोग

एक-दूसरे का सुख-दुख सुनाते हुए मिलें


ऐसा अगर हो मुमकिन कि छुट्टियों में हम

कुछ शाम एक साथ बिताते हुए मिलें