जख्म खाने की दुआ मांगी है

दिल लगाने की दुआ मांगी है


तेरे आने की दुआ मांगी है

फिर न जाने की दुआ मांगी है


मैंने बचपन खुदा से मांगा है

चार आने की दुआ मांगी है


मेरा बिछड़ा हुआ मिल जाए मुझे

बस मिलाने की दुआ मांगी है


खुदा से मैंने बस इक पत्थर को

दिल बनाने की दुआ मांगी है


जिंदगी तुझसे ही आजिज़ आकर

कत्ल-खाने की दुआ मांगी है


मेरी वीरान तमन्नाओं ने

घर सजाने की दुआ मांगी है


भूख से रोते हुए बच्चों ने

दाने-दाने की दुआ मांगी है


मेरे बहते हुए इन आंखों ने

तेरे शाने की दुआ मांगी है


बारहा इश्क़ भुला देता हूं

फिर सिखाने की दुआ मांगी है


मेरे तारों ने सुबह बूझने तक

झिलमिलाने की दुआ मांगी है


मिश्र' ने अपनी बदनसीबी से

कुछ बनाने की दुआ मांगी है