इश्क़ में ख़ुद को ख़ुदा करते हुए

लोग जो गुज़रे वफ़ा करते हुए


बात पहुँची आसमानों तक मेरी

ये हाथ जब उठे दुआ करते हुए


हो गए बरसों पुराने लोग हम

रोज़ ही ख़ुद को नया करते हुए


बाप की आँखों में आँसू आ गए

बेटी को घर से विदा करते हुए


मुश्किल होती है विदाई की घड़ी

कि रो रहा है दिल जुदा करते हुए


मुश्किलों में की दुश्मन की मदद

फिर दोस्ती ने दिल बड़ा करते हुए


कि क्रूरता रावण बनाती है सदा

और राम बनते हैं दया करते हुए


फेफड़ों में भर गया माँ के धुआँ

बूझते चूल्हे को हवा करते हुए