हे पथिक तनिक भी भय न कर
अपनी ऊर्जा का क्षय न कर
मुस्काता चल अंधियारे में
अंतर्मन के उजियारे में
प्रेम स्नेह छलकाता चल
अपनी धुन में मदमाता चल
सींच आंसू से जीवन पथ
सत्य से तू आसक्ति रख
जो दुर्जय है जो अविजित है
उसको जयघोष सुनाता चल

हे पथिक तनिक भी भय न कर
अपनी ऊर्जा का क्षय न कर
मुस्काता चल अंधियारे में
अंतर्मन के उजियारे में
प्रेम स्नेह छलकाता चल
अपनी धुन में मदमाता चल
सींच आंसू से जीवन पथ
सत्य से तू आसक्ति रख
जो दुर्जय है जो अविजित है
उसको जयघोष सुनाता चल