जिंदगी इस तरह तड़पाने लगी है

गुजरी बातें याद फिर आने लगी है

जो हमारे जिस्म का हिस्सा थे कल तक

जिंदगी अब उनको बिसराने लगी है

जो सुबह निकला था सूरज जा रहा है

काली अंधेरी रात फिर आने लगी है

एक मुद्दत से दबी हुई थी दिल में बातें

दिल की बातें होठों तक आने लगी है

पहले ज़ख़्म दिये हैं फिर मरहम लगाकर

फिर से ज़ालिम हमको बहलाने लगी है