सारे सुख को अज़ाब होना था
हमको इतना ख़राब होना था
आंसू इसलिए बहते हैं इन से
शायद आंखों को नाब होना था
कांटे कांटे ही रह गए आख़िर
फूल को तो गुलाब होना था
अब क्या फ़ायदा है रोने से
हो गया जो जनाब होना था
हम न समझे सवाल को शायद
हमको जिस का जवाब होना था
नींद है ही नहीं बस आंसू हैं
जिन आंखों में ख़्वाब होना था
मौत आनी ही थी कभी न कभी
ज़िंदगी का हिसाब होना था
किस को होना था दीन दुनिया में
“मिश्र” सब को नबाब होना था

