दिल के होते-होते जाँ के हो गए
मेहरबानी मेहरबाँ के हो गए
रात ने सबको लिया आगोश में
सब मुसाफ़िर आशियाँ के हो गए
अब हमारे दौर के सब नौजवाँ
नौकरी और इम्तिहाँ के हो गए
फ़ासला कम है हमारे बीच अब
हम दूरियों से दरमियाँ के हो गए
आशिक़ी के बाद तो आशिक सभी
एक जहाँ से दो-जहाँ के हो गए
मैंने जो लिक्खे थे वो किरदार सब
अपनी-अपनी दास्ताँ के हो गए
कुछ परिंदों ने बनाया घोंसला
कुछ परिंदे आसमाँ के हो गए
हम रात भर तन्हाइयों के साथ थे
सुबह-सुबह कारवाँ के हो गए
दर्द सारे झेले पौधों ने मगर
फूल सारे बाग़बाँ के हो गए
हम यहाँ के थे ज़िस्म में जान तक
मौत आई उस जहाँ के हो गए
दौलत से बस इतनी तब्दीली हुई
झोपड़ी से छत मकाँ के हो गए
पासबाँ से पूछिए कैसे या क्यूँ
टुकड़े-टुकड़े गुलिस्ताँ के हो गए
लफ्ज़ मेरे जल गए कुछ आग में
और कुछ म'आनी धुआँ के हो गए
बोलने वाले बहुत से लोग थे
इसलिए हम बे-जुबाँ के हो गए
जब अकेले थे उदासी के हुए
महफ़िलों में मेज़बाँ के हो गए

