तुम जो आओ तो कोई बात बने
दिन बने मेरा मिरी रात बने
तेरी चुप्पी से सवालात बने
बद से बदतर मिरे हालात बने
ख़ुद से मिलना भी हो जिसमें शामिल
कोई तो ऐसी मुलाक़ात बने
मेरी तक़दीर बनाने वाले
तेरे हाथों से मिरा हाथ बने
मेरी पहचान बने ग़ज़लों से
इश्क़ वालों से मेरी ज़ात बने
जिस तरह साथ हैं दरिया सागर
मेरी ख़्वाहिश है तिरा साथ बने
कैसे मुमकिन है कि दिल वालों की
अक्ल वालों से कोई बात बने
पहले किरदार बना है मेरा
बाद में मेरे ख़यालात बने
ज़ख़्म पे ज़ख़्म कुरेदे हम ने
तब कहीं जा के निशानात बने
