दूरियां बढ़ गई दायरा बढ़ गया
थोड़ी दौलत हुई तो नशा बढ़ गया
उम्र बढ़ती गई जैसे-जैसे मेरी
मुश्किलें बढ़ गई मसअला बढ़ गया
हर शहर की यही एक दास्तान है
लोग कम हो गए बुत-कदा बढ़ गया
ज़िंदगी के सफर का ये हासिल रहा
मंज़िलें रह गई क़ाफ़िला बढ़ गया
राह तकते रहे आपके आने की
हम खड़े रह गए रास्ता बढ़ गया
मैं जैसे ही पीछे हुआ वक्त से
छोड़ मुझको मेरा फ़ल्सफ़ा बढ़ गया
आशिकी में हुए मुब्तिला जब से हम
हिज्र का वस्ल का सिलसिला बढ़ गया
आप ने दाद दी शुक्रिया आपका
आप आए मेरा हौसला बढ़ गया
नई सड़के बनी दूरियां कम हुई
ये भी सच है,मगर हादिसा बढ़ गया


