बाकी हैं अरमान बहुत
सो दिल है हलकान बहुत
जीना बेहद मुश्किल है
मरना है आसान बहुत
दुख का आंगन सूना है
सुख के हैं मेहमान बहुत
झुकना मतलब गिरना है
सर पर हैं सामान बहुत
आते-जाते देखे हैं
हम ने भी सुल्तान बहुत
दो रोटी थोड़ा सा प्यार
एक आंगन-दालान बहुत
बस राह के पत्थर तोड़ने हैं
तोड़ी है चट्टान बहुत
सारी दुनिया करती है
दौलत का गुन-गान बहुत
दुख के दिन पर भारी है
हल्की सी मुस्कान बहुत
मतलब ने ही किया यहां
रिश्तों का नुकसान बहुत
आसां लिखना मुश्किल है
और मुश्किल आसान बहुत
बात बात पर देती है
मिश्र” ये दुनिया ज्ञान बहुत
