ऐ मोहब्बत जो हम तेरे घर आए हैं

ज़िंदगी का सफ़र छोड़ कर आए हैं


जुर्म सारे तुम्हारे तुम्हारा फरेब

सारे इल्ज़ाम क्यूँ मेरे सर आए हैं


ये यकीं है यहाँ कुछ मिलेगा हमें

इसलिए इश्क़ वालों के दर आए हैं


देख कर आपको याद आया मुझे

आप ख़्वाबों में पहले नज़र आए हैं


शब अँधेरे में तो कल ठिकाने प थे

रोशनी में भटक कर किधर आए हैं


रेलगाड़ी में बैठे हुए गिन रहे

मेरी आँखों में कितने शज़र आए हैं


हम ही कल उसके घर से निकलते हुए

उसकी आँखों में शब भर ठहर आए हैं


आप तो इस गली के मुसाफ़िर नहीं

भूल कर रास्ता क्या इधर आए हैं


हम कहीं और इतने न देखे गए

तेरी आँखों में जितने नज़र आए हैं


सारी मंज़िल तुम्हारे हवाले तेरी

मेरे हिस्से में तेरे सफ़र आए हैं


रोशनी का पता पूछते-पूछते

हम किसी चाँद चेहरे के घर आए हैं


तेरे दिल में जगह हो तो रख ले मुझे

तेरी आँखों से होकर गुज़र आए हैं


सारी रंगीनियाँ हो गई हैं उदास

तेरे पीछे जो हम तेरे घर आए हैं


आप थक जाएँगे दौड़ते-दौड़ते

मेरे हिस्से में इतने सफ़र आए हैं