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यादें
NityaShukla
Jun 16, 2020
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कितना संभाला , सहेजा , समझाया भी खुशियों का दाना पानी देकर , प्यार से सहलाया भी। खुलते परों को , हाल के किस्से सुना कर बहलाया भी। लेकिन ,यह ख्यालों का बेवफा परिन्दा...... न जाने क्यों बार बार उसकी यादों की देहरी पर जा बैठता है , और ताकता रहता है निशब्द ....... उन कभी न खत्म होने वाली फिल्मों को। जिन्हें देखकर मैं बिना बात ..... गीली आँखों से मुस्कुराया भी।।।।।।।
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NITYA
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