कविता 1: रूहानी राही
भीड़ बहुत है इस दुनिया में, पर हर कोई हमसाया नहीं होता,
दिलों के सूने रास्तों पर, हर किसी का साया नहीं होता।
जो पढ़ ले आँखों की नमी और ख़ामोशी को बिना कहे,
वो यार ख़ुदा की रहमत है, उसे हर किसी ने पाया नहीं होता।
बाज़ार सजे हैं यहाँ रिश्तों के, पर वफ़ा का कोई मोल नहीं,
सच्चे दोस्त के इन अश्कों का, दुनिया में कोई तोल नहीं।
तूफ़ान भी घुटने टेक दे उस कश्ती के आगे महज़,
जिसके साथ हो ऐसा राही, जिसका कोई मेल नहीं।
— साहित्यप्रेमी ✍️
