कोई और तो नहीं आयेगा शायद,
एक लड़की आयेगी मुझे ढूंढती हुई,
अपने हाथ में मेरा आखिरी खत दबाए हुए,
जिसे सारे रास्ते वो बार बार पढ़ती आई है,
वो पूछेगी मेरा पता,
तुम नहीं बता पाए तो शायद पकड़ ले तुम्हारा गिरेबां,
फिर शायद रो कर बैठ जाए वहीं और रो दे वो आंसू जो वो सालों से नहीं रो पाई थी,
उस पल में उसे कमजोर मत समझना,
वो रो रही है पर अपनी इच्छा से, वो बहुत मज़बूत लड़की है, मैं उसे जानता हूं,
उसे रोती हुई देख पानी पी लेने को मत पूछना,
वो जानती है उठ कर अपने हिस्से का पानी भर लेना और पी लेना,
उसे अगर रोना हो तो उसे रोने देना, वो नहीं मानेगी, ऐसी ही है वो,
अगर कोई आयेगा तो वो लड़की आयेगी, मेरा पता पूछते हुए,
शायद एक लड़का भी आए,
मेरा दोस्त मेरा यार,
वो गुस्से में होगा, तुम सब पर झेंपेगा,
शायद तुम सब को कुछ कटु शब्द भी कहे,
खरी खोटी भी सुनाए,
शायद वहां से मुझे ढूंढने अकेला वापस निकल जाए,
उसे भी रोकने की कोशिश मत करना,
वो उंगली दिखा के कहेगा की मुझे मजबूर मत करो हाथ उठाने पर,
अपनी बांह तुम से छुड़ा कर निकल जायेगा वहाँ से गुस्से में,
उसके बांह छुड़ाने के उस झटके से तुम्हें मालूम होगी उसकी भुजाओं की ताकत,
मत आना उसके रास्ते में, वो सब कुछ चीर कर निकल जायेगा,
शायद एक लड़का भी आएगा।
फिर शायद ईश्वर आयेंगे,
तुम सब नशे में हो उन्हें पहचान नहीं पाओगे,
पर इस बात से उन्हें कुछ फ़र्क नहीं पड़ेगा,
तुम सब के ठीक बीच वो बैठ जाएंगे,
बैठने से ठीक पहले उनका सिंहासन बन जाएगा,
तुम सब इस चमत्कार की चर्चा करोगे पर वो फफ़क कर रो देंगे,
अपने आखिर बचे कुछ बच्चों में से शायद एक और को उन्होंने खो दिया, इस बात के गम में वो मौन हो जाएंगे,
तुम थाली बना कर लाओगे की उनका स्वागत करो,
ईश्वर स्वयं तुम्हारे घर आए है पर वो उसे हाथ की ठोकर से उछाल कर फेंक देंगे,
और स्वयं पर नियंत्रण रखने की पूरी कोशिश के बाद वो भी तुम्हें एक उंगली दिखा कर चेतावनी देंगे, की तुम उनसे दूर रहो,
मेरे ईश्वर मुझसे मेरे मित्र सा ही व्यवहार करते हैं,
इन सब के चले जाने की बाद मुझे ना जान पाने की अगर ग्लानि हो तो शायद इन्सानियत का बीज तुम में फिर से फूट पड़ेगा,
अगर ना हो ग्लानि तो तुम्हें मुबारक संसार और उसका नशा,
आएंगे तो ये चंद लोग और मेरे ईश्वर आयेंगे।
- नितिन वासु

