इस निरस अनोखी दुनिया मे है प्रेमगीत गाती होली इस सूखी बंजर धरती में कोई फसल उगाती है होली जहाँ सब व्यस्त हैं कामों में नफरत है सब इन्सानों में बेरंगी सी इस दुनिया में कुछ रंग घोलती है होली इस दुखियारे से जीवन में कुछ खुशियाँ भरती है होली सुनसान पड़े इस आँगन में कोई इश्क ग़ज़ल गाती होली जहाँ प्यार नही है अपनों में खो गया है वो बस सपनों में बेदर्दी सी इस दुनिया में संदेश ये देती है होली कि भूल जाओ सब बैर क्रोध हो प्रेममग्न खेलो होली।