मातृभूमि के नाम पर हम सर झुकाने में कतराते हैं ।
राष्ट्रगान होने पर हम खड़े होने में हिचकिचाते हैं ।
अरे,उनसे पूछो जो हमारे लिए दिन रात अपना लहू बहाते हैं ।
हम तो बैठे अपने घरों में करते रहते हैं ठिठौली ।
नहीं सोचते उनके लिये जो हमारे लिए झेल रहे पत्थर और गोली ।
एक आंतकवादी के मरने पर सब सड़कों पर आ जाते हैं ।
पर एक सैनिक के मरने पर सब घर में ही रह जाते हैं ।
अब तो जागो यारों वरना बहुत अनर्थ हो जायेगा ।
अपने देश के टुकड़े होंगे दुश्मन हँसी उड़ाएगा ।
कसम खा लो एक जुट होकर हम सैनिकों का आत्मबल बढ़ाएंगे।
और देश के दुश्मनों को देश से मार भगाएंगे ।