जिन्दगी इतना तड़पाती है क्यों, हर पल यूँ रुलाती है क्यों, अन-चाहे रास्तों पर ले जाती है क्यों, अपनों को गैर बनाती है क्यों, हमेशा हार का सामना करवाती है क्यों, ऐ जिन्दगी - मेरे सवालों से आँख चुराती है क्यों ।