एक बचपन ही था जो हर बात से अनजान था ।
ना कुछ पाने की ख्वाहिश थी,ना कुछ खोने का डर था ।
ना खुशी का पता था,ना गम से पहचान थी ।
बस चेहरे पे मासूमियत थी,और लबों पे मुस्कान थी ।
एक पिता का एहसास था,और बस माँ से पहचान थी ।
वो प्यारा सा बचपन था,और वक़्त की रफ्तार थी ।
