कब तक करते रहेंगें हम कड़ी निंदा, कब तक होते रहेंगें ऐसे शर्मिन्दा कब तक हम ऐसे ही मासूमों की जान गवांते रहेंगें, कब तक हम वीर जवानों के शव तिरंगे में लिपटे घर भिजवाते रहेंगें कब तक - आखिर कब तक ?????