Poetry 1 min read 802.1K reads

वो अजनबी


मेरी रग रग से वाक़िफ है, हर हरकत पहचानता है,वो जो दूर अज़नबी है, मुझे अच्छे से जानता है।

हां, तुम जो पूछोगे, साफ़ मुकर जायेगा,अजी बड़ा ही ढीट है, हल्के में कहां मानता है !

— नितिन कुमार हरित
Read more Earn more Learn more