तुमने तो बस कह दिया,

ना देखा मेरा अंतर्मन,

ना समझी मेरी अभिलाषा,

ना सोचा एकाकी जीवन।।


तुमने तो बस कह दिया,

ना दिखे मेरे छूटे सपने,

ना दिखा मेरा उघड़ा सावन,

ना दिखे मेरे खोये अपने।।


तुमने तो बस कह दिया,

ना दिखे मेरे आंसू अन्दर,

मैं तड़पी सिमटी क्षणिक हुई,

ना सुना मेरे भीतर का स्वर।।


मैं आस जुटाती रही सदा,

अश्रु अंतिम भी बह गया,

"तुम नहीं साथ में चली कभी",

तुमने तो बस कह दिया !!


~ नितिन कुमार हरित