जब भी, जितनी भी देर, मैने प्रेम कविता लिखी,
प्रेम ने, तब तब उतना ही मुझे भी लिखा !!
हां, मुझे स्वीकार है,
ऐसे ही लिखते लिखते...
एक दिन पूर्ण प्रेम हो जाना !!
~ नितिन कुमार हरित


जब भी, जितनी भी देर, मैने प्रेम कविता लिखी,
प्रेम ने, तब तब उतना ही मुझे भी लिखा !!
हां, मुझे स्वीकार है,
ऐसे ही लिखते लिखते...
एक दिन पूर्ण प्रेम हो जाना !!
~ नितिन कुमार हरित