भावों के अंबार सा, ये बोलता जो मौन है,
पूछता है रोज़ मुझसे, "तू बता ना कौन है",
हाय! पर मैं दे ना पायी, अपना परिचय आप को,
क्या कहूं, कि वेदना का, मेरे भीतर भौन है..!
~ नितिन कुमार हरित


भावों के अंबार सा, ये बोलता जो मौन है,
पूछता है रोज़ मुझसे, "तू बता ना कौन है",
हाय! पर मैं दे ना पायी, अपना परिचय आप को,
क्या कहूं, कि वेदना का, मेरे भीतर भौन है..!
~ नितिन कुमार हरित