एक बरसात के बाद,

जब मिट्टी नम हो जाती है,

और घेर लेता है अंधेरा....

अक्सर उग जाते हैं कवक!

कवक...

जी हां वही, सांप की छतरियां..!

सुनो, कभी जब तुम जीतोगे...

तो उस जीत की बरसात में भी,

आने देना नम्रता की धूप,

जिससे कभी ना पनप सकें,

ये कवक...

घमंड के...

स्वार्थ के !!


~ नितिन कुमार हरित