जबसे तू गयी है,
ये घर बहुत बड़ा हो गया है,
और आंगन उदास...
तितलियां, चिड़िया, कोई भी तो नहीं आता,
कहीं तू ही तो नहीं ले गयी, अपने साथ ?
और बस छोड़ गई है यहां, ये हिचकियां !!
आज फिर से पढ़ रही थी, माँ ये खत...
बरसों पहले बेटी को लिखा था,
बस भेज ना पाई।
~नितिन कुमार हरित

