मुझे अच्छे से याद है
तुमने कहा था...
'सुनो, प्रेम में
मुझे गुलाब मत देना,
जानती हूँ,
ये बहुत सुंदर हैं,
महकते भी हैं,
पर, हमेशा नहीं रहते
ये भी मुरझा जाते हैं,
इस शरीर की तरह...
देखो, प्रेम में
मैं तुम्हारे लिए
शब्द लाया हूँ
ये नहीं मुरझाते
ये नहीं मरते...
- नितिन कुमार हरित

