
क्या तेरा, क्या मेरा जग में, चिड़िया रैन बसेरा हो,
जीना हो तो कुछ ऐसे जी, छूटे जग का फेरा हो।
मैं मैं करता कौन थका है, सुध बुध सब बिसराई रे,
धर्म कर्म सब रुपया पैसा, दौलत खूब कमाई रे,
मौत खड़ी थी जब द्वारे पर, दौलत काम ना आई रे,
करनी का फल मिला जगत में, देता फिरे दुहाई रे,
कितना सच है, कितनी उलझन, कैसा भ्रम का डेरा हो !
क्या तेरा, क्या
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