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आईना


कुछ हसरतें कुछ दीद,कुछ खुआब् कुछ उम्मीद।एक एहसास समंदर का,मैं आईना हूँ,अक्स हूँ, तेरे अंदर का।।

— नितिन कुमार हरित
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