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अब सुबह भी, सुबह नहीं होती

बचपन का वो दिन मुझे आज भी याद है। उस रोज़, दोपहर का खाना खाया और सो गया। शाम हो आयी पर आँख ही नहीं खुली। घर के दरवाज़े पर पूरी मित्र मंडली जमा हो गयी थी। हमारा नियम जो था, जो टाइम पर नहीं आयेगा, उसे बुलाने उसके घर, सारे के सारे जायेंगे, मिल के। 

अचानक आँख खुली, सीधा मुँह धोया और बस निकल पड़े... आज आइस पाइस

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