मौत की परछाई


श्वेत वर्ण का रूप लिए रूह के पीछे छुपे,

संग रहे हमेशा, बस काले वर्ण के पीछे छुपे


हक़ से मांगे वो अपना हक़, मूक शब्द से,

जीवंत परछाई को उम्र भर सहेजे मौत से


जीवित देह देखे न उसे, अपने में ही उलझे,

श्वेत मुख की चाह, श्वेत सत्य से कौन उलझे


आलिंगन का समय आया, श्वेत वर्ण ही मिला,

धूमिल हुआ कला वर्ण, देह माटी में मिला ।।



नितिन खन्ना