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छलकता ज़ाम

बहुत मिला पीने को दर्दोंगम के आंसू,

अब एक छलकता ज़ाम चाहिए।


ग्लास भर से उतरेगा न चेहरा

उस मगरुर का मेरी आंखों से,

पीने को मयखाना तमाम चाहिए।


चाहिए थी जो वो जिंदगी न मिली,

मिली है जो, जिंदगी नहीं सजा है।


पूछा खुदा से क्यों दी ऐसी जिंदगी,

ख़ामोश ह

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