तू याद भी न आए हमे जिस दिन,
कहीं से तो शाम ऐसी आए एक रोज
मेरी बातें भी तुझे याद न आए जिस दिन,
कही से तो ये खबर आए मुझे एक रोज
बड़ा कहते थे मेरे अपनों के बारे में,
मेरे अपने ही काम आए मुझे एक रोज
तुझे भूल भी जाता कब और कैसे,
तेरी याद किसी मोड पे मिल गई मुझे एक रोज
हाँ आज तेरी यादों ने नुकसान बहुत किया,
मुनाफा भी दिया था इन ख्वाबों ने एक रोज
अब लोग दावा करते है के समंदर उनका है,
मैंने तो गहरा डूब जाने का सोच था एक रोज
खामोशी से रह जाता था कहीं गुमनाम सा,
इस जमाने ने मुझे लोग बना दिया एक रोज
इस उमीद में की तेरे आने की खुशी मिलेगी,
ये खुशी कहीं मेरी जान ले जाएगी एक रोज ||
नितेश


