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एक रोज की बात

  तू याद भी न आए हमे जिस दिन,

कहीं से तो शाम ऐसी आए एक रोज


मेरी बातें भी तुझे याद न आए जिस दिन,

कही से तो ये खबर आए मुझे एक रोज


बड़ा कहते थे मेरे अपनों के बारे में,

मेरे अपने ही काम आए मुझे एक रोज


तुझे भूल भी जाता कब और कैसे,

तेरी याद किसी मोड पे मिल गई मुझे एक रोज


हाँ आज तेरी यादों ने नुकसान बहुत किया,

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