मैं कभी तन्हा नहीं होता,

वो हमेशा मेरे साथ होता है...

इन्सान तो साथ नहीं होता,

मगर भगवान हमेशा साथ होता है l


खुद से ही कितनी बातें कर लेता है मैं,

क्योंकि माँ - बाप की दुआएँ साथ लेकर चलता हूँ मैं l


तन्हाई भरे गाने क्यों गाते हो तुम,

खुद से ही इतना क्यों डर जाते हो तुम,

खुद को ही सवारों खुद को ही निखारो,

खुद में इतने रूप छिपाए बैठे हो, इन्हें बाहर

निकालते क्यों नहीं तुम l


ये दीवारें ये किताबें ये तख्त पलट देंगे सारे,

इनसे बातें करके देखो ये जवाब देते हैं सारे l

रात का अंधेरा और दिन का उजाला है,

पेड़ - पौधे, पक्षी, हवाएं और पानी है,

हम सब पर ही बराबर प्राकृतिक मेहरबानी है l

इनसे जब घुल मिल जाओगे,

आनंद से भर जाओगे और फिर कभी तन्हाई भरे गाने तुम नहीं गाओगे l

और फिर कुछ कमाल कर जाओगे....


~नितेश कुमार गुप्ता