कोई इश्क़ में है
कोई हिज़्र में है
हैं ग़मगीन ये दुनियाँ
पर अपने ही गम में है
हकीक़त से क्या रुबरु होंगे
हर कोई यहाँ मिसाली-रियासत में हैं
ग़र बच जाओ तुम किसी की आँखों में डूबने से
झाँक लेना बाहर कोई बच्चा कई दिनों से भूख में है
तुम लड़ते रहना अल्लाह ईश्वर के नाम पे यूँ
बेकसीं के लिए वो एक मुस्कान, एक रोटी में है
हैं मकाँ जिसके क़ैद हो जायेंगे फिर से वबा के डर से
मज़दूर का क्या, उसकी तो रोजी रोटी सड़कों पे हैं !
हैं हालचाल खराब मगर,
कहने को क्या, सब मजे में है...!!!


