जब चान्द पर जाना तो उससे कहना,

तुम सिर्फ एक पत्थर का टुकड़ा नहीं,

उम्मीदों की एक निशानी हो,

हर रात चमकने वाली ढेरों कहानी हो।

किसी के मामा , किसी के दादा,

तो किसी के हमसफर की निशानी हो,

अंधेरी रातों में तुम्हारी रौशनी ,

दिखाती है सबको रास्ता।

जब भी देखें तुम्हें ,

लगे जैसे दिल का है तुमसे रिस्ता,

ना जाने कितने ग्रहण झेले तुमने,

फिर भी तुम चमकना ना भूले ,

छाये काले मायूसी के बादल,

फिर भी हर रोज की तरह,

तुम यूं ही मुसकुराये,

तुम इश्क हो , तुम दर्द हो ,

सुनसान रास्तों पर एक साथ हो,

अमावस की रात आओ मिलने,

सीखनें हैं कितने ही गुर जीने के तुमसे।