वक़्त कहाँ ...'s image
655K

वक़्त कहाँ ...

वक़्त कहाँ अब कुछ पल दादी के किस्सों का स्वाद चखूं,

वक़्त कहाँ बाबा के शिकवे, फटकारें और डांट सहूँ।


कहाँ वक़्त है मम्मी-पापा के दुःख-दर्द चुराने का,

और पड़ोसी के मुस्काते रिश्ते खूब निभाने का।


रिश्तों की गरमाहट पर कब ठंडी-रूखी बर्फ जमी,

सोंधी-सोंधी मिट्टी में कब, फिर लौटेगी वही नमी।


जब पतंग की डोर जुड़ेगी, भीतर के अहसासों से,

Read More! Earn More! Learn More!