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आओ मन की परतें खोलें...

लाल-लाल से बादल ऊपर,

और नीचे धानी सी चादर,

दूर क्षितिज पर ढलता सूरज,

क्या कहता है हौले-हौले।

आओ मन की परतें खोलें।


जिनका जीवन है पहाड़ सा,

पर चेहरों पर मुस्कानें हैं,

उन मुस्कानों की मिठास को,

आओ अपने संग संजो लें।

आओ मन की परतें खोलें।


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