अभी उजाला दूर है शायद...'s image
302K

अभी उजाला दूर है शायद...

दीवाली-दर-दीवाली ,

दीप जले, रंगोली दमके,

फुलझड़ियों और कंदीलों से,

गली-गली और आँगन चमके।


लेकिन कुछ आँखें हैं सूनी,

और अधूरे हैं कुछ सपने,

कुछ नन्हे-मुन्ने चेहरे भी,

ताक रहे गलियारे अपने।


खाली-खाली से कुछ घर हैं,

कुछ चेहरों से नूर है गायब,

अलसाई सी आँखें तकतीं,

अभी उजाला दूर है शायद।


Read More! Earn More! Learn More!