आज देखा मेने की रात है क्या

एक बड़ा प्यारा ऐहसास है रात

रात का वो घनघोर अंधेरा,

अंधेरे में चमकता चांद,

चाँद से ले उधार रोशनी

चमकते तारे पल पल करते

इशारे कभी जलते कभी बुझते

कभी बुझते कभी जलते सारे

रुक जाती पक्षियों की चहचहाने की

आहट सो जाते जीब सजीव सारे