खामोश हैं देख फिर भी कुछ कह रहीं हैं
आज लफ्ज़ नहीं देख मेरी आँखें बोल रही हैं
इनमें प्यार है तेरे लिये कितना ये खुद ही बयान कर रहीं हैं
ये आँखें मेरी तेरे प्यार का इज़हार कर रहीं
इन आँखों में डूब जा तू इस तरह फिर
छुपा लू तुझे में इनमें कहीं पुतलियों की तरह
पलकों कि तरह करू हिफाज़त में तेरी रखूं बना के तुझे ख्वाहिश मेरी....
Siya raghuwanshi


