हम दूर बहुत है....।।
" हर ख़त के साथ
कुछ ख्वाहिशें मै बांध देती हूं।
जिसे वो बड़ी नज़ाकत से
सम्भल कर
एक बक्से में जमा करता रहा।
पर अब
मै चाहती हूं
वो बेच दे,
इन हसरतों की पूंजी को
और बस
लौट आए
मेरे पास....."
हम
दूर
बहुत
हैं.....
NIRIKSHA KANSARA


हम दूर बहुत है....।।
" हर ख़त के साथ
कुछ ख्वाहिशें मै बांध देती हूं।
जिसे वो बड़ी नज़ाकत से
सम्भल कर
एक बक्से में जमा करता रहा।
पर अब
मै चाहती हूं
वो बेच दे,
इन हसरतों की पूंजी को
और बस
लौट आए
मेरे पास....."
हम
दूर
बहुत
हैं.....
NIRIKSHA KANSARA